मोहम्मद अफज़ल की सजा
आजकल समाचार पत्रों में मोहम्मद अफजल की काफी चर्चा है, कुछ लोगों के अनुसार चुंकि उसके टरायल में उचित न्याय प्रक्रिया का इस्तेमाल नही किया गया है अतः उसकी फांसी की सजा को माफ कर दिया जाना चाहिए या फिर उसे उम्र कैद में तब्दील कर दिया जाना चाहिए। कुछ लोगों एवं सगंठनो ने इसके लिए राष्टरपति से गुहार भी लगाई है।
परंतु यहाँ जो विचार करने योग्य बात है कि यदि उसे अपना वकील करने की इजाजत दे दी गई होती तो क्या उसका अपराध कम हो जाता? उसके विरुध संसद पर हमला करने की साजिश का आरोप है जो कि एक प्रकार से भारत के विरुध युद्ध के समान ही अपराध है। मै नही जानता कि इस अपराध के लिए सजा-ए-मौत से कम क्या सजा हो सकती है।
कभी-कभी कुछ घटनाओं को देख-सुन करक लगता है कि हम भारतीयों को अपने देश से उतना प्रेम नही है जितने का हम दिखावा करते है। हमारी नजरों में हमारे राष्टर के सम्मान की कोई कीमत नही है। तभी तो कभी एक मंत्री की बेटी के अगवा होने पर हम खुंखार आतंकवादियों को रिहा कर देते है, कभी चरारे-शरीफ में छुपे आतंकवादियों को सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता देते है। और हद तो तब होती है जब एक विमान के अपहरण के पश्चात्त हमारे विदेश मंत्री आतंकवादियों को सस्मान् कंधार छोड़ कर आते है। और दलील दी जाती है कि यह सब कुछ राष्टरहित में किया गया है।
यह एक कड़वी सच्चाई है कि पूरी ताकत एवं प्रयासों के बावजूद हम अपने पड़ोसी को अपने देश के खिलाफ षड़यत्रं करने से रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे है। लेकिन क्या हम इतने गये-गुजरे है कि पकड़े हुए आतंकवादियों को कड़ी से कड़ी सजा देकर, उनके मन में खौफ भी पैदा नही कर सकते। अगर हम उन्हें रोक नही सकते तो इतना तो बता ही सकते है कि हमारे खिलाफ षड़यत्रं की सजा है उनकी मौत!
और अभी-अभी ताजा समाचार है कि सरकार ने अफज़ल की सजा को कुछ समय के लिए होल्ड कर दिया है (स्रोत्र : NDTV Website)
http://www.ndtv.com/template/template.asp?id=20407&template=Parliamentattack&callid=0&frmsrch=1&txtsrch=afzal
October 7, 2006 at 8:29 am
yeh seb serkari drama hey!!