दो महिने के बाद CBI ने राजेश तलवार को क्लिन चीट दे दी है। दो महिने तक सभी चैनलों की धमाचौकड़ी, दिमागी कसरत व खुद जाँच ऐजेंसी बनने के बाद भी आज तक आरुषि-हेमराज हत्याकाँड का खुलासा नही हुआ है। जमानत पर रिहा होने के बाद भी राजेश तलवार पर शायद अभी भी शक की गुजांईश बाकी है। लेकिन इस सब ड्रामे के बीच जो अच्छी बात लगी, वह है अनगिनत खबरिया चैनलों के बीच मे से एक न्यूज चैनल का निष्पक्ष एवं स्वच्छ रुप में सामने आना। जब सैकड़ों चैनलो के बातचीत के प्रस्ताव पर दुर्रानी दपंती ने कहा कि वे केवल NDTV चैनल से बातचीत करेगें और केवल उसी चैनल के रिपोर्टर को अपने बयान की बाइट देंगे, तो दिल को कुछ सुकुन का एहसास हुआ। लगा कि लोग स्वच्छ एवं सुघड मिडिया को पहचानते है। नही तो इन न्यूज चैनलों को देख कर तो लगने लगा था कि लोगो कि दिलचस्पी अब खबरों में न हो कर केवल भूतप्रेत एवं अपराधियों की कहानियों मे है।
पिछ्ले एक-दो सालों का मेरा स्वयं का अनुभव बताता है कि खबरिया चैनलों की भीड़ मे केवल NDTV ही एकमात्र चैनल है जो खबरों को सनसनी न बनाकर, उनकी तह तक पहुँचने की कोशिश करता है। और साथ ही खबर के हर पक्ष का विश्लेण करने का प्रयास करता है। जिसमें वह कभी सफ़ल होता है और कभी नही भी होता है। लेकिन उसके प्रयासो मे ईमानदारी साफ़ दिखाई देती है। इस बात से काफ़ी राहत मिलती है कि “सबसे तेज” चैनलों की भीड मे एक चैनल तो है जो खबरों को संतुलित एवं निष्पक्ष रुप में दर्शकों तक पहुचाने मे अभी भी यकीन रखता है। केवल NDTV ही ऐसा एकमात्र चैनल है जिस पर तांत्रिको एवं अपराधियों के मेलोड्रामा के लिए कोई जगह नही है।
एक न्यूज चैनल का अपनी तमाम व्यवसायिक मजबूरियों के बावजूद अपने को स्तरीय एवं संतुलित बनाये रखने का प्रयास निश्चय ही प्रशंसनीय है। NDTV को सलाम! आखिर खबर तो वही है जो सच दिखाये।
July 15, 2008 at 1:51 pm
सही कहा आपने..
July 15, 2008 at 4:52 pm
Humare yahan NDTV aata hi nahi. Phir bhi achcha laga padh kar ki koi channel to hai jis par bharosa kiya jaa sake.