दशहरा और रामलीला

आजकल रामलीला की काफ़ी धूम मची हुई है। अपना भी बहुत मन करता है रामलीला देखने का, दोस्तो के साथ लेकिन एक तो समय का परोब्लम और फ़िर अब साथ जाने के लिए कोई दोस्त भी नही बचा। सब मशरूफ हो गये है दुनियादारी में। पहेले बहुत मजा आता था जब सब दोस्त साथ मिल कर रामलीला देखने जाते थे और बहुत मस्ती करते थे। वो किसी सुंदर लडकी को देखकर शरारत करना, या फ़िर झुले झुलना, एक बार में तो कभी मन भरता ही नही था, कभी कभी घर पर रामलीला देखने का बहाना बना कर नाईट शो देखने जाना, या फ़िर दोस्तो के साथ देर रात तक सडकों पर बेमकसद घूमना। सब कुछ कितना अच्छा था। लेकिन अब तो रामलीला देखने गये हुए ही कितने साल हो गए हैं। लेकिन सच कहें तो लगता है कि अब रामलीलाओं में वह बात नही रही, सब कुछ नकली हो गया है। रामलीलायें भक्तिमय न रहकर राजनितिक मंच हो गई है। अब भी कभी कभी केबल वाले की कृपा से लोकल रामलीला का लाईव प्रसारण देखने को मिल जाता है लेकिन वहाँ रामलीला कम और राजनिति होती ज्यादा दिखाई देती है। मंच पर आसीन सभी लोग अपना राजनीतिक कैरियर परवान चढाने की कोशिश में लगे दिखाई पडते है। इतने सब के बावजूद दशहरे पर रावण फुंकता हुआ देखने अभी भी जाता हुँ। भीड का एक हिस्सा बनने में कभी-कभी ही मजा आता है। कभी हम किसी के कंधों पर चढे थे आज किसी को हम अपने कंधों पर चढायेगें।

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3 Responses to दशहरा और रामलीला

  1. समीर लाल कहते हैं:

    स्वागत है हिन्दी चिठ्ठाजगत मे. हिन्दी मे सफलतापूर्वक टंकण कर लेने के लिये बधाई.

  2. SHUAIB कहते हैं:

    हिन्दी चिठ्ठाजगत मे स्वागत है 🙂

  3. idanamum कहते हैं:

    स्वागत के लिए धन्यवाद

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