रियेलिटी शो और जनता

अक्टूबर 6, 2007

सोनी का इंडियन आईडिल खत्म हो चुका है, जी टीवी का “सा रे गा मा” भी अपने अंतिम पड़ाव पर है और हमे लगा था की शायद स्टार का “वी ओ आई” भी अब कुछ हफ़्तो में अपना लगंर उठा लेगा। लेकिन नही जनाब, इस हफ़्ते निर्देशक ने ऐसी छ्ड़ी घुमाई की अब इस प्रोग्राम को तीन महीने तो आराम से खींचा जा सकता है। “वाइल्ड कार्ड एट्रीं” से तीन प्रतियोगियों को दुबारा चांस दिया जा रहा है, और यह सब हो रहा है जनता की माँग पर। लेकिन जरा इन लोगों से पुछो कि यदि यह जनता की माँग थी तो जनता ने इन्हें पहले निकाला ही क्यों।

कल एक मजेदार वाक्या और देखने को मिला, आदरणीय जजों ने अपने वीटो पावर के द्वारा दो कि बजाए तीन उम्मीदवारों को “वाइल्ड कार्ड एट्रीं दिलवाई। वजह? क्योंकि तीसरी प्रतिभागी भी काफी अच्छा गाती है और उसका बाहर होना उसके टैलेंट के साथ नाइंसाफी होता। लेकिन जब वही प्रतिभागी पहले बाहार हो रही थी तभी इन जजों ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल क्यों नही किया? और अगर जनता नें इन्हें फिर से बाहर कर दिया तब क्या होगा? क्योंकि जनता तो सब मेरी तरह है संगीत का “क ख ग” भी नही जानती। जिसका गाना जिस दिन दिल को भा गया बस उसे ही वोट दे दिया। बाकी दुसरे ज्यादा योग्य उम्मीदवार की सारी मेहनत, सारा रियाज जायें भाड़ में। पता नही यह जज वहाँ बैठकर, संगीत की जानकारी रखते हुये भी ऐसा क्यों होने देते है। चाहे वह इंडियन आईडिल हो, सा रे गा मा हो या फिर स्टार वी ओ आई हो सब जगह एक ही कहानी है.

और यह सब होने दिया जाता है सिर्फ sms से होने वाली कमाई के लिये। जजों को अपनी नौटकी का पैसा मिल जाता है, चैनल को अपना हिस्सा और निर्देशक को अपना। बाकी सगींत की सेवा वह तो केवल दिखावा है जनता से sms मांगने का। इस हफ्ते इंडिया टुडे में छपी रपट के अनुसार इंडियल आईडिल को अब तक 7 करोड़ तथा सा रे गा मा को 5.5 करोड़ sms मिल चुके है। यदि 3 रूपये की एवरेज कोस्ट भी लगाई जाए तो 15 से 20 करोड़ की आमदनी तो केवल sms के द्वारा ही। जब लोगों को बेवकूफ बना कर भी इतनी कमाई की जा सकती है तो संगीत की गहराई में डूबने की क्या आवश्यकता है। जीतने के बाद चाहे इन विजेताओं को कोई भी न पुछे, इससे इन लोगों को क्या। यह लोग तो अगले साल फिर से नए चेहेरों को लेकर जनता को बेवकूफ बनाने आ जायेगें

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विंडोज का लाइव राईटर

अक्टूबर 4, 2007

अभी कुछ देर पहले ही श्रीश जी के ब्लाग पर इस टूल के बारे में पढा था। पढते ही डाउनलोड कर लिया और ट्राई भी कर लिया। चलो इस बहाने से ही काफी दिनों के बाद कुछ पोस्ट तो किया, नही तो हम अपने ही चिट्ठे को भुलते जा रहे थे।